किस कदर हमने एक इंसान को चाहा,

जिसे भुला पाना बस की नहीं और पाना किस्मत में नहीं।



कभी शाम ढले तो मेरे दिल में आ जाना,

मगर आना इस तरह कि, यहाँ से फिर ना जाना।

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